India H1

हरियाणा प्रदेश के किसान सरसों की कटाई और कढ़ाई करते समय  रखें इन विशेष बातों का ध्यान, मुनाफा होगा डबल

Farmers of Haryana state should keep these special things in mind while harvesting and harvesting mustard, profit will be double.
 
सरसों की कटाई

हरियाणा प्रदेश के किसानों के लिए सरसों की कटाई करने का सही समय मार्च-अप्रैल  का महीना उचित माना गया है और सही समय पर सरसों की कटाई ना करने से किसान को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है। आपको बता दें कि सरसों की फसल लगभग 135 दिन की होने पर ही कटाई करनी चाहिए। इस समय सरसों में नमी की मात्रा 25 से 30% तक ही रहती है।

बहुत सी वैरायटी ऐसी होती है जो की 40 से 50% नमी तक कटाई की जाती है। ज्यादातर किसान साथी ऐसे भी हैं जो सरसों की फसल 150 या 160 दिन की होने पर कटाई करते है। ऐसा करने पर किसान को बहुत बड़ा नुकसान हो जाता है। सरसों 5 से 10% तक ज्यादा पकने के कारण नीचे गिरने की संभावना ज्यादा रहती है। इसका खामियाजा किसान को सरसों की फसल में नुकसान उठाकर भरना पड़ता है।

सरसों निकालते समय ना करें यह गलती

ज़्यादातर किसान साथी ऐसे भी हैं जो सरसों निकलते समय अपनी सुविधा की ओर ज्यादा ध्यान देता है। अपनी सुविधाओं के अनुसार उस समय किसान साथी ऐसी मशीनरी का प्रयोग करते है, जिसमें सरसों का 10% हिंसा आगे चला जाता है और दो से 3% सरसों की दाल बन जाती है। इससे किसान साथी को सरसों की फसल में लगभग 15% के आसपास नुकसान हो जाता हैं।

किसान साथी सरसों निकलते समय करें उचित मशीनरी का उपयोग 

अक्सर हम देखते हैं कि सरसों की फसल पकाने के बाद किसान साथी उसे निकालना की जल्दबाजी में लग जाते हैं। सरसों की फसल निकलते वक्त किसान साथी कई बार उचित थ्रेसर का प्रयोग ना कर किसी नॉर्मल थ्रेसर से सरसों की फसल निकलवा लेते हैं। जिससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ता है। किसान साथियों को सरसों की फसल निकालते समय पुन्नी थ्रेसर का प्रयोग करना चाहिए। क्योंकि पुन्नी थ्रेसर सरसों निकालने के लिए बहुत ही लाभदायक मानी जाती हैं। ऐसे मे किसान साथी धैर्य से काम लें।

किसान साथी सरसों निकालने के बाद सरसों को सुखी जगह पर रखें, जिसके कारण उसकी नमी की मात्रा कम हो सके। किसान साथी सरसों का मंडी में तोल करवातें समय अपनी फसल को 
पास में रहकर ही तोल करवाऐ। किसान साथी अगर अपनी फसल का मंडी में अपनी आंखों के सामने तोल करवाएंगे तो इससे व्यापारियों द्वारा फसलों के तोल के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी करने की आशंका बिल्कुल कम हो जाती है।