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केचुआ खाद बनाने तथा प्रयोग करने की विधि 

Method of making and using earthworm manure and the income from it
 
केंचुआ खाद

 केंचुआ खात बनाने की विधि: किसान को एक विशिष्ट प्रजाति के केंचुए जो पेड़ पौधे के पत्तियां ,सब्जियों के अवशेष, गोबर ,कार्बनिक पदार्थ खाकर मल द्वारा चाय के पत्ति जैसा काले रंग का पदार्थ निकालते हैं उसे वार्मिंग कंपोस्ट या केंचुए की खाद कहा जाता है किसान सबसे पहले 8_9 फीट की ऊंचाई का एक सेड तैयार कर ले यदि किसान के पास घने वृक्ष हो तो वह भी उपयुक्त माना जाता है क्योंकि इसे ठंड वह छाया दोनों मिलती है

केंचुए का बेड जमीन की सतह के बराबर ही 10 फीट लंबा 3 फीट चौड़ा और 1.5 फीट ऊंचा बना लेते हैं बेड की लंबाई ,चौड़ाई अपनी सुविधा के अनुसार बना सकते हैं बेड की सतह गिला करने के बाद दो-तीन इंच घास फूस की पत्तियां बिछा दें इसके बाद गला सड़ा कार्बनिक पदार्थ तथा 10 12 दिन पुराना गोबर एक पॉइंट पांच तक बेड में डाल दे

बेड को गोबर कार्बनिक पदार्थ से भरने के बाद 5-6 दिन तक छोड़ दे तथा इसमें पानी का छिड़काव करते रहे

एक-दो दिन के बाद इसे उल्ट पुल्ट करते रहे ताकि गोबर में से निकलने वाली भाप बाहर निकल जाए और तापमान कम हो जाए

5 दिन के बाद में गोबर का तापमान चेक करना चाहिए इसके लिए हमैं अपना हाथ गोबर की खाद में डालने पर गरम नहीं लगना चाहिए यह समय केंचुओ को खाद में छोड़ने का सही समय होता है

तैयार किए हुए बेड में हमें 3 किलो ऐसीनिया फाटिडा प्रजाति के केंचुए छोड़ देने चाहिए
 बेड की देखरेख कैसे करें

केंचुए छोड़ने के बाद बेड को अच्छी तरह केले के पत्ते या बोरी से ढक देना चाहिए क्योंकि केचुए अंधेरे में अधिक क्रियाशील रहते हैं


बेड का तापमान सही रखने के लिए सर्दी में एक बार तथा गर्मी में दो-तीन बार पानी का छिड़काव करना चाहिए 

40 से 50 दिन बाद केंचुए गोबर वह कार्बनिक अवशेषों को खाद में बदल देते हैं

खाद तैयार होने पर आप बेड में पानी का छिड़काव करना बंद कर दे जैसे-जैसे खाद का ढेर सूखता चला जाएगा वैसे-वैसे केचुए नीचे नमी में चले जाएंगे और आप ऊपर से तेयार खाद हटा सकते हैं यदि किसान इस बेड के पास एक नई बेड बनकर तैयार रखें तो केचुए अपने आप दूसरे बेड में चले जाते हैं

आपके तेयार किए हुए बेड में तीन से चार क्विंटल खाद तैयार हो जाती है
 खेती में केंचुए खाद का उपयोग

इस खाद में सुक्षम जीवाणु होते हैं जो मिट्टी में पाए जाने वाले जीवाणुओं को सक्रिय कर मिट्टी की उर्वरक शक्ति को बढ़ाते हैं जिसे खेत में पैदावार अच्छी होती है
 केंचुए के खाद में हारमोंस की मात्रा अधिक होती है इससे मिट्टी में वायु संचार तथा जलधारण की क्षमता में वृद्धि होती हैं
केंचुए की खाद से मिट्टी में पाए जाने वाले भौतिक व रासायनिक जीवाणु मैं भी सुधार होता है

केंचुए की खाद टिकाऊ खेती के लिए अधिक लाभदायक मानी गई है