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DELHI KA WEATHER: दिल्ली में जनवरी ने बनाया ठंड और सूखे का नया रिकॉर्ड, मौसम की करवट के साथ फिर बढ़ेगी कड़ाके की ठंड, जानिए मौसम का हाल..

मौसम विज्ञानी इसके लिए जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ पश्चिमी विक्षोभ की कमी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। दिल्ली में हर साल दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है, लेकिन पिछले दो वर्षों में मौसम चक्र बदल गया है।
 

indiah1, Weather Update, नई दिल्लीः  जनवरी 2024 न केवल आपको पहले दिन से ही कंपकंपी का एहसास करा रहा है, बल्कि ठंड और सूखे के नए रिकॉर्ड भी बना रहा है। जहां इस महीने में पिछले डेढ़ दशक में सबसे अधिक शीत लहरें और ठंड के दिन देखे गए हैं, वहीं दिसंबर के बाद जनवरी में भी दिल्ली से बारिश पूरी तरह से दूर हो गई है।

मौसम विज्ञानी इसके लिए जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ पश्चिमी विक्षोभ की कमी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। दिल्ली में हर साल दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है, लेकिन पिछले दो वर्षों में मौसम चक्र बदल गया है। यदि दिसंबर अब अंतिम चरण में ठंडा हो रहा है, तो ठंड दूसरे भाग तक जारी रहती है, जनवरी में मकर संक्रांति तक नहीं।

सर्दी का मौसम चल रहा है

दिसंबर के बजाय जनवरी में भी बर्फबारी शुरू हो गई है। इस वर्ष जनवरी के अंतिम सप्ताह और फरवरी के पहले सप्ताह में बर्फबारी होने की संभावना है। इसलिए इस साल सर्दी भी लंबी होने वाली है। बदलते मौसम के परिदृश्य का मतलब है कि सोलह वर्षों में दूसरी बार जनवरी इतना शुष्क है। मंगलवार की देर रात हुई बूंदा-बांदी के अलावा महीने के 26 दिनों में एक भी बारिश नहीं हुई।

10 दिनों की शीत लहर और ठंड के दिन दर्ज किए गए

शेष पाँच-छह दिनों में बारिश होने की संभावना नहीं है। दिसंबर भी पूरी तरह से सूखा था। इस स्थिति के कारण दिल्लीवासियों को सामान्य से अधिक ठंड और कोहरे का सामना करना पड़ रहा है। नौ वर्षों में पहली बार जनवरी में शीत लहर और शीत दिवस की श्रेणी में 10 दिन देखे गए हैं।

दिल्ली में जनवरी में 21.7 मिमी बारिश होती है। इससे पहले, जनवरी 2016 और जनवरी 2011 सबसे शुष्क महीने थे। वर्ष 2016 में भी बारिश दर्ज की गई थी, जबकि 2011 में 0.5 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। इस बार भी शून्य बारिश हुई है, केवल बूंदाबांदी हुई है।

16 वर्षों के दौरान जनवरी में वर्षा के आंकड़े

2024-बूंदाबांदी
2023-- 20.4 मिमी
2022-- 88.2 मिमी
2021-- 56.1 मिमी
2020-- 48.1 मिमी
2019-- 54.1 मिमी
2018-4.4 मिमी
2017-33.9 मिमी
2016-बूंदाबांदी
2015-24.1 मिमी
2014-- 10.8 मिमी
2013-33.9 मिमी
2012-- 13.9 मिमी
2011-0.5 mm
2010-6.2 मिमी
2009-5.8 मिमी